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२०७८ के जनगणना आउ कठरिया समाज

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अर्जुन कठरिया
पहलमानपुर, २३ कार्तिक ।।
जनगणना का हे ? जनगणना काहिक आवश्यक हे ? जनगणना के खास अर्थ हे सरकार द्वारा निर्धारित क्षेत्र में निश्चित समयमें बैठल मनैन संख्या जौन धर्म, जात, पेशा, लिंग, भाषा, भेषभुषा, रितिरिवाज, जन्म, मरण, बेह बरातके निश्चित लहल संख्या जनगणना हे ।

या इ कही सकत होई की जो मनाईन गणना वैज्ञानिक रुपमें करल जीता उहि जनगणना हे, जो सरकारी मापदण्ड पुरा करत होइ । विश्वके हरेक देश जो अपना नागरिक भरिन आर्थिक, सामाजिक, मानसिक, व्यवहारिक स्थिती पता करके अपना जनतन कल्याण करेक तहनि जनगणना आवश्यक तथा सरकार अपना आर्थिक स्रोत या आय बढाइक तहनि जनगणना आवश्यक परता ।

सरकार द्वारा हरेक १० सालमें जनगणना करती आइत हे । यदि नेपालके जनगणनाके बात कह्बो ते पहिलबार बिक्रम सम्बत १९६८ मे हुइला अर्थात सन १९११ नेपालमें जनगणना करत १ सय १० पुग्गईल आहे । सुरुमें नेपालके जनगणना नाम मात्रके रेहे जेहमें मनाईन मुडिया खाली गनल गिला । सबति पहिले जनगणना नेपालमे श्री ३ जंगबहादुरके समयमें विक्रम सम्बत १९११, १९१२ आउ १९१३ में सुरु होइल मुल व्यवस्थित रुपमें बिक्रम सम्बत १९६८ मे चन्द्र शमशेरके द्वारा सुरु होइल रेहे । बैज्ञानिक जनगणना नेपालमे २०२८ साल में हुइला ।

पहिल विस्तृत जनगणना विक्रम सम्बत २०३५ में सुरु होइल रेहे वहका पाछे २०३८, २०४८, २०५८ आउ २०६८ निरन्तर होइत गईल आउ २०७८ के जनगणना फेक सुरु हुइ गेल आहे । जातिगत जनगणना २०६८ के हिसाब ति थारू जनसंख्या १७ लाख ३७ हजार ४ सय ७० हे जो की कुल जनसंख्याके ५.६ प्रतिशत हे जौन नेपालके चौथा बडा जनसंख्या रहल जाति हे ।

अब जाति गत जनगणनाके बात करि ते कह्बो नेपाल सरकार २०४८ साल ति करती आइत हे । नेपालमें रहल थारू फेक बहुत भाषा भाषिक रहल आहें जैसे पश्चिम नेपालमें थारू भाषामे कठरिया, राना थारू, देशौरा दंगाहा आउ देउखरिया भाषा जबकी मध्य नेपालमें अवधी , भोजपुरी, बज्जिका, नवलपुरीया, चितौनिया रहल हें जबकी पुर्बी नेपालमें कोचिल्ला, राजबंशी, मैथली आदि थारू भर मन्कतियाँ ।

बात पश्चिम नेपालके बाँके, बर्दिया, कैलाली, कञ्चनपुर जौन नमा देश फेकुन कह्तियाँ वहाँ रहबैया कठरिया भरिन बारेमें बात करे जाइत होइ । गइल जनगणना २०६८ में कठरिया सामाज नेपाल कठरिया भरिन मातृसंस्था जनचेतनामुलक कार्यक्रम संचालन करले रेहे । जौन बहुत मजा पक्ष रहल मुल जौन भुमिका खिलना रेहे भुमिका सयाद नाइ खेल पाइल, यदि खेलत ते २०६८ में कठरिया भरिन जनसंख्या पता चलत मुल वहका लेखा जोखा नाइ मिलल जौन की कठरिया समाजके बहुत बन्ना चुक या भुल हे काहिक की यदि हम्रे अपना जनसंख्या जनगणना ती सहि पता निकर्ले रहती ते स्थिति कुछ आउरे रहत ।

कौन मामलामें की हम्रे अपना जनसंख्याके आधार लैके अपना समाजके तहनि सम्बैधानिक रुपमें अधिकार माग करती मुल हुंवाँ बन्ना भारी चुक होइल । जब सहि जनसंख्या नाइ रहि ते हमरे कौन आधार ति हमरे अपना माग स्थानिय, प्रदेश आउ केंन्द्र सरकार ति करब । उहि मारे जनगणनामें सचेत हुइना अति जरूरी आहे । गईल २०७८ महिना भदौं १२ गते कान्तिपुर पत्रिकामें प्रकाशित समाचार अनुसार संघिय सरकार १२ भाषा केहें कामकाजके भाषा घोषणा करल ।

जेहमें सुदूरपश्चिमके कामकाज भाषा डोटेली आउ राना भाषा हुइना कहल बात आइल । मुल चार दिन पाछे राना थारू भाषा कामकाजिक भाषा ति बाहिर करके सिधे थारू भाषा सिफारिस करल पाछे, राना थारू भर आन्दोलन करने मुल भाषा आयोग हम्मर तिया राना थारू भाषिक यकिन संख्या नाइ रहलके कारण हमरे राना भाषा केहें प्रदेशके कामकाजी भाषा नाई बनाइ सिकब कहना बात आइल आउ रानाभर आन्दोलन ति पाछे हटेक परल जौन दुर्भाग्य आहे ।

उहि मारे राना भरिन जैसन नियती नाई भोगेक तहनि हमके सचेत होइक जरूरी हे । कठरिया भरिन एक यकिन जनसंख्या नाइ रहलके कारण ति हमरे अपना माग मुद्दा आगे नाइ बढाई पाईत होइ । अइना जनगणना २०७८ के कातिक २५ गते ति लईके अगहन ९ गते ती हुइना जनगणनामे हमरे कठरिया अपना जनगणनामें जरूर सहभागी होइ । यदि कठरिया भरिन अपना अधिकार संविधानमें सुनिश्चित कराईना हे । तौ हमरे कुछ बातमें ध्यान जरूर धरि । कैलालीमें खास करके पुर्बी कैलालीमें कठरिया भरिन जनसंख्या बहुत ढेर हे मुल अन्य जातिन ति ज्यादा बैबाहिक सम्बन्धके करण ति कठरिया भाषा लोप के संघे संघ अब हमरे कठरिया नाई होइ कहना कहाइ सुरु हुइ सिकल हे ।

जौन बहुत खतरनाक लक्षण हे । कैलालीमें कठरिया भरिन जनसंख्या अनुमानित ८० हजार ति एक लाख रहल हे मुल खास कठरिया भाषिक जनसंख्या ३५ ति ४० हजार केल रहल हे । इ दिखाईत हे कि कठरिया भरिन अस्तित्व आउ भाषाक अन्त होइत फेक दिखाइत हे । उहि मारे सक्कु कठरिया भर अबकी आइना जनगणनामें सहभागी होइक नाइ छुटेक परल अबकि चुकब ते दश बरस आउ पाछे हुइ जाइब ।

कठरिया भरिन ताहिन इ जनगणना काहिक अति महत्वपूर्ण हे ? जनगणना ति कठरिया समाज वहके का मिली ? कैसे करब आउ का करना हे जनगणना लिखाइनामें ?
अति महत्वपूर्ण ई माइनेमें हे कि ई कठरिया भरिन संविधानमें हक अधिकार स्थापित करेक तहनि संघे संघ राज्यके मुलधारमें आइक तहनि । का मिली कहना सवालमें बात इ हेकी यदि हमरे अपना जनसंख्यक पुरा विवरण रख्ख्ब ते अइना दिनमें संघतियक मुल मर्म अनुसार मौलिक अधिकार के संघ भाषा, कला, पहिरन के संरक्षण करेक राज्य ति सहयोग लेहे सिकब काहिक अन्य जातक तुलनामें कठरिया ज्यादे पाछे परल आहें आउ पाछे कराईल गैल आहें । ई आइल जानगणना २०७८ अति महत्वपुर्ण ई माईने में हे कि हर एक जात जातिक अधिकार जनसंख्या अनुसार सुनिश्चित हुइना कहल हे उहिक मारे हमके कुछ बात में ध्यान दहना जरूरी आहे ।

१. अपना जात का लिखैना ?
२. महत्वपूर्ण बात कि भाषामें का लिखैना ?
३. पुर्खक भाषा का लिखैना ?
४. दुशरा माध्यम भाषा का लिखैना ?
५. धर्म में का लिखैना ?

ई कुछ प्रश्न जो हम्मर पहिचान दिबाइ सकत हे यदि सहि प्रयोग करब कहलेती अन्यथा हम्मर अस्तित्व फेक मिटाइ सिकी उहिक मारे जो सवाल हे वहमे ज्यादे ही ध्यान देहना जरूरी आहे ।

बात हे जात लिखाइना सवालमें तौ हम्मर जात सबती पहिले कठरिया लिखना ही रहि काहिक की हमरे कठरिया ही होइ कुइ औरे नाइ । आउ जब भाषा के बात हे तौ हम्मर भाषा कठरिया हि रहि । एक सवाल करले हे की पूर्खाक भाषा तौ वहमें फेक कठरिया ही लिखना जरूरी हे काहिक कि अबके पुस्ता अपना कठरिया भाषा विसराइत गैलके कारण ति हम्मर भाषा के पता चली आउ जो मनकेक विसरा डरले आहें उ फेक पता चली कि हम्मर पुरखा का भाषा मनकत रेहो । बात रहल माध्यम के भाषा तौ सबती अग्राह हे कि माध्यम के भाषा थारु केल लिखाइ मुल कुछ लोग कही सकत हें ।

कि हमरे ते थारु नाइ मनकति ते स्वेच्छा ति मन परल भाषा लिखा सकत हें लेकिन मनकना मातृभाषा कठरिया लिखाईना जरूरी हे । अन्तिम महत्वपुर्ण सवाल हे धर्म ते बहुसंख्यक कठरियाभर हिन्दु लिखहें लेकीन हिन्दु हमरे नाइ होइ कहना स्पस्ट होइ । हम्मर धर्म ते प्रकृति पूजक हि होई मुल हमरे सक्कु कठरिया भरिन एक रुपता लाइक तहनि हिन्दु धर्मकेल लिखाई ।

अन्तमें हमरे कठरिया थारूभर आईना जनगणनामें थोरिक जागरुक बनी अपना जात कठरिया, भाषा कठरिया लिझाइ गणक भरिन सहि जानकारी दिहि आउ अपना जानसंख्या पता लगाई । काहिक महत्वपुर्ण कहना सवालमें बात ई हे की अब अधिकार सुनिश्चित करना समय हे, कठरिया भरिन अस्तित्व रक्षा करेक तहनि, स्थानिय, परदेशिक आउ केन्द्रिय तहमें अवसर पाइक तहनि ई जनगणना अति महत्वपूर्ण हे संघे संघ कठरिया समाज केंहे आगे लाइक तहनि २०७८ के जनगणना वहके अवसरके रुपमें लिहि ‘मोर जनगणना मोर अधिकार’ कहना नारा वहके फेक सफल करि । मोर कहना अत्ने हे कि सहि बात गणक वहके बताई आउ कठरिया भरिन जनसंख्या पता लगाइ आउ राज्य ति पाइना सुबिधा ति बन्चित कठरिया समाज केंहे ऊ सुविधा दिबाइ ।

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