कठरिया सन्देश

२० फाल्गुन २०८०, आईतवार

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  • भावना ‘बेचैनी बात बातमे’

    भावना ‘बेचैनी बात बातमे’
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    जुड जुड हावा बहत हे हाई रि ई पुष महीना में
    जाड़ के असर कतना हे आके देखो मोर आँग्ना में ।

    कब उराई जाड़ मिच्छाई जाबे आगी तापत तप्ता में
    जन काहिक लागता अक्केले जुड जुड ई सथरि में ।

    समझ नाई पईतु काहिक हुइता बेचैनी बात बात में
    दिलके बात सम्झैया कुई हे की अंधेरी करिया रात में ।

    अब ते कुई साजना ढूँढेक परि दीनमें दिया बार बार के
    माघ आइत हे करम खूब मस्ती कुई प्याराक याद में ।

    पुरा करीयो मोर माँगन भग्मान चढैम करिया मुर्गा मान के
    रात नाई कटता तुम्हर वीन प्यारा ई पुषक कडक जाड़ में ।

    महुँ कहम दाई बाबा ती बेहके बात चलैयो आइत माघ में
    कुई तो बनी मोर फेक सजना जेहका मैं ड़ूबल हौं याद में ।

    साजन के जोडी तो बहुत जलमल हुइहें ई सुन्दर संसार में
    एक प्यार वाला साजना पठाउ अइत रहल बसन्त बहार में ।

    पुष के रात तो जैसे तैसे कटा लहमु पैराक गद्दम सुत के
    जाड़ तभी कटी है जब ब्यवस्था होई रुई, फुई , दुई हुई के ।

    रचनाकार -बिपासा कठरिया
    बन्ना भुरबा

    सुचना तथा संचार मन्त्रालय,
    दर्ता नं. : 071/72/770,
    पान नं.: 6026465656565656565

    ब्यवस्थापक :- अर्जुन कठरिया

    प्रकाशक :- राजेन्द्र कठरिया

    प्रधान सम्पादक :- टिआर कठरिया

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