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कठरिया समाज नेपाल स्वास्थ आउ तन्दुरुस्त कब होई ?

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सियोग कठरिया
भजनी – ७ चर्रा कैलाली, १२ मंसिर ।।
कुई फेक सँघ संस्था एक मानब रुपि शरिर हे । एक शरिरमे कयौं अंग रहता आउ कयौं अंग मिलके एक शरिरके निर्माण हुइता । अस्ते करके हम्मर एक संस्था हे । वहका नाउँ हे कठरिया समाज नेपाल । उदाहरण के रुपमे अध्यक्ष हे मुरिया, कोषाध्यक्ष हे पेट, सचिब हे आँखी अन्य सदस्य भर कुई सदस्य हाथ हें कुइ सदस्य गोर, नाक, कान आदि इत्यादि ।

हम्मर जिवनमे कयौं शरिर रुपि संस्था अइने जैसेकि कठरिया समाज, कठरिया समाज सुधार । ई संस्था जलम लेहने आउ सठ्ठी नाई हुइति मर गैने । अस्ते करके एक संस्था कठरिया समाज नेपाल जनम लेहल । जलम लेहती कि खुब स्याहार सुसार, दुध, दार–भात, भिटामिन आउ पुर्ण खोप पाके बाँस कैसा सलक बाढ गैल । जवानीमे लक्कड≥मे वहका बेह होइल । बेहमे खुब दिनरात गैने बजैने और नच्ने
। मुल एक सुशिल, सुन्दर आउ गुणवान दुल्हि घर नाइ लापैनें । इहि बेहमे नाचल बहानाती या कुई अपाङ्ग हुइगेल । वहके फालिस मार देहल ।

जब कठरिया समाज नेपाल वहके फालिस मारल तब उपचारके तहन अस्पतालमे भराना करना जरुरत देखके तुल्सिपुर कोंटामे भरना करने । तब फेक वहका हाथ गोर नाइ नाई चलल । तभिमारे कुछ चले कहिके एक आउ बरा अस्पताल मे भराना करना सोंच बनाइल गैल । तब दुसरा कठरिया होरी उत्सब चर्रा नामक अस्पतालमे भराना करल गेल । इहि उपचार करना क्रम ति थोरी थोरी फाईदा लागल मुल केवल उँगरी केल चलल । तभु फेक अपाहिज हे । इहि अपाहिज कटैना क्रममे एक आउ बरा सर्च अस्पताल खुल्ना तरखरमे है । उ अस्पतालके जग, निउँ, पिल्लर उठगेल हे । ओहका नाउँ हे तिसरा कठरिया होरी उत्सब २०७८ साल ।

मोर बिचार ति शरिरके कुछ अंग बढिया है तो कुछ अंगमे क्यान्सर जैसन घातक रोग लागल है । इ रोग पलना ति खराब अंग अपरेशन करके फेंक देहना जरुरी है । नाहित अउरे अंगमे फेक सरी आउ खराब हुई सकि । यदि हाथ गोर बढिया हुइना सम्भाबना है तौ चाहे खरपतवार, चाहे आयुर्बेदिक, चाहे एलोपेथिक् दबा खाके या खबाके ठिक करो या अंग प्रत्यारोपण करके । यदि प्रत्यारोपण करना है तौ जौन हाथ गोरमे केवल हड्डी, खलरीमे सिर्फ पानी भरल नाई करो कि जौन हाथ गोरमे मास, मजबुत हड्डी आउ हड्डीक भित्तर मेंघि, ताजा खुन भरल होबे उहि अंग छाँटके प्रत्यारोपण करो ।

हम्मर सबका चाहत आउ कामना है कि शिघ्र कठरिया समाज नेपाल स्वास्थ्य आउ तन्दुरुस्त होबे । आउ हालि हालि एक सुन्दर, सुशिल आउ गुणवान दुल्हनियाँ घर लाबे ताकि होरी उत्सब एक अस्पताल के रुपमे नाई कि एक नम्मा दुल्हि ओहके हरेक साल फगुई के रुपमे मनाई । हर्ष उल्लासके रुपमे मनाई आउ हरेक साल दुल्हनियाँ वोहके निनहर कराईक तहन पुटरी बाँध देहना हम्मर सब कठरिया दादा–भैया, दिदि–बहिनि भरिन जिम्मेवारी हे । चाहे दुई दिनका सिधा (चाउर) बाँधेक परे चाहे दश दिनका ।

आईना ओला तिसरा कठरिया होरी हुइना ती पहिले नम्मा दुल्हनियाँ देखेक मिले कहती आउ कठरिया समाज नेपाल स्वास्थ्य आउ तन्दरुस्त सिघ्र लाभ होबे और दिन दोगुना रात चौगुना उन्नती आउ प्रगती होबे कहती आज बिदा होइत हौं । जय कठरिया

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